This is dedicated to my source of inspiration who gifted the first line to begin with.
मेरी धडकनों की रवानी है तुमसे ,मेरी हर ख़ुशी हर कहानी है तुमसे,
शुरु होती थी कहानी जब हँसता था मैं,बंद आखो से उसको प्यार करता था मैं,
सोचा कह दूंगा अपने हर दिल की बात उससे...
पर ये न जाना था , वो प्यार न करती थी मुझसे,
चंद लम्हे साथ बिताये थे हमने, लगता की वरसों का साथ हो जैसे ,
मिलने की बाते किया करते थे तुमसे,पर न मिल पाते थे वरसों तक तुमसे,
इसी दूरी को एक अहसास समझ बैठे हम, और शायद उनसे प्यार कर बैठे हम,
पर ये राज अधूरा ही रहता, क्योकि प्यार भी एक तरफ़ा ही रहता,
सोचा पूछूँगा एक बार मैं उनसे, क्या प्यार किया तुमने भी हमसे?
जब पूछा हमने इस राज को , वो दूर हमसे हो गई उसी रात को!
वो रिश्ता भी टूटा, साथ भी छूटा, बस रह गए अल्फाज को,
वो मेरा प्यार भी झूठा , गम भी झूठा , बस रह गए अरमान को,
उस अरमान को मैं एक लाश बना बैठा,
क्यों की गलती उसकी न थी ,गलत मैं समझ बैठा,
दोस्ती के रिश्ते को मैं प्यार बना बैठा,
ऐसी ही कहानी हमने लिखी हैं तुमसे, क्योंकी मेरी हर ख़ुशी हर कहानी हैं तुमसे!!
द्वारा :- संदीप शरद
सेनिओर प्लानिंग इंजिनियर
अच्. बी. टी. आई. कानपूर

hmmmmmm.. niceeeeeeee
ReplyDeletethnx alot..
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