"गजल" ही थी तेरे नाम की जो मैं लिखता रहा !!
ज़िंदा हैं तेरे याद में, वो शब्द कह रहे हैं,
मरता नहीं हैं कोई, किसी याद के लिए,
जीता हैं वो यहाँ, किसी साथ के लिए,
चले थे दो कदम तो मुलाकात हो गई,
पीछे देखा हमने तो बरसात हो गई,
नम हुए ये आशू, एक प्यार के लिए,
ज़िंदा हूँ यहाँ बस तेरे साथ के लिए,
वो लफ्ज थे मिले, कुछ याद लिख दिआ,
तेरे नाम पे आज फिर एक साज लिख दीआ,
वो साज था पुराना एक राज के लिए,
उस राज के नाम पे एक गजल लिख दीआ,
उस गजल में तेरे नाम को, जब खोजने चला,
दूर तलक जाकर मैं फिर रुक गया,
मैं सोचता रहा और जगता रहा,
वो "गजल" ही थी तेरे नाम की जो मैं लिखता रहा ....
द्वारा :- संदीप शरद
बी . टेक . :- अच्. बी. टी. आई. - कानपूर