एक मासूम चेहरे पर , एक चेहरा याद आया
जिसे चाहते थे, आज वहीँ याद आया,
न उठा फ़ोन उसका, न वो फ़ोन आया
यादें उसकी, जिसने दिनभर रुलाया,
आंसू जो भी बिखरे , वो मोती बन गए थे
समेटा जब उसको, तो वो नाम याद आया,
यादों में मेरे हर लम्हा याद आया
भुला जो उसको , तो और याद आया,
यादों मैं तनहा, हर लम्हा मर रहा था
बस कश - में - कश में, अपनी जिंदगी जी रहा था,
शायद चाहने लगा था, उसे अपनी ज़ी जान से ज्यादा
पर न जाने क्यों, मुझे डर सा लग रहा था,
मेरे पास आई, वो मेरी बन गई हैं
ऐसा वो मुझको, सपना सा लग रहा था,
आखे खुली, तो देखा था हमने
न कोई कॉल आया, न कोई फ़ोन था,
टूटा वो दिल , बिखर सा गया था
वो मासूम सा चेहरा फिर याद आया,
जिसे चाहते थे, वहीँ नाम आया
मिली न मुझको, वो दूर जा चुकी थी
ऐसी वो घटना, घटी जा चुकी थी......घटी जा चुकी थी.......!!!
द्वारा :- संदीप शरद
सीनिओर प्लानिंग इंजिनियर (सिविल)
बी . टेक . :- अच्. बी. टी. आई. - कानपूर
