Sunday, 19 July 2020


हमारी कहानी - Covid-19

चार दीवार चार मरीज, सब पर था करोना का कमीज़
कुछ माइल्ड, कुछ मॉडरेट, मगर इलाज हुआ सबका परफेक्ट
दुवाएं थी चाहने वालो कि, जो मॉडरेट थे, वो माइल्ड हो गए। और जो माइल्ड थे, वो हस्ते हुए चाइल्ड हो गए।।
खूब हस्ते थे, हसाते थे, सबकी टेंशन को मिटाते थे
इम्यूनिटी को था बढ़ाना, इसीलिए सभी को था हसाना
डॉक्टर और स्टाफ का पी पी पी ई किट में आना, 
उनका पसीना देख, हमारा पसीना आना
वहीं था जो मनोबल बढ़ाता था, और हमे करोना कि जंग से जिताता था


फिर क्या था,

 जाने का समय आ गया, बीता हुआ 10 दिन याद आ गया
चार दीवार थी, ना हवा थी ना खुला आसमान था
मगर सबसे दोस्ती हुई, वो भी एक मुकाम था
सुबह होती तो हश देते, शाम तक खूब मजे लेते
पता ही ना चला, कब दिन गुजर गया
घर जाने का फिर फरमान मिलने लगा।
क्या जिंदगी हैं, कहां लेकर आती हैं
मौत के घर पर भी, दोस्ती निभा जाती हैं
और यहीं दोस्ती करोना पर जीत लाती हैं।
पर हम ये भी ना भूलनेगे, पी पी पी ई किट कैसे डॉक्टर स्टाफ झेलेंगे।
बहुत मुश्किल ये सेवा, जो करते हैं बिना चाहत की मेवा
खुदा उनको भी रब रखे, करोना से स्वस्थ रखे।।

संदीप शरद

Friday, 17 July 2020


COVID - 19, MY STORY


12-July-2020
Pre Hospitalization

मैंने रोज की भांति रात्रि का भोजन किया, थोड़ा टहलने बाहर चला गया, टहलने के बाद आकर बिस्तर पर लेट गया, रात्रि 01:15 बज गए। तभी अचानक पूरा बदन टूटता हुआ महसूस हुआ, गले में खराश सी महसूस होने लगी, सिर और आंखो में दर्द महसूस होने लगा, नाक बंद होने लगी जैसा कि सर्दी-जुकाम में होता है वैसा ही बस। मगर इन सबसे हटकर बात ये हुई कि बुखार जो अचानक 102 डिग्री पहुंच चुका था। मैंने पेरासिटामोल 650 mg लिया, मगर रात भर बेचैनी के कारण सो ना सका। किसी तरह रात बीती और सुबह हुई , फिर क्या था आनन फानन में कुछ डॉक्टर दोस्तो और घर वालो से बात हुई, और उसमे मिले जुले सलाह मिलने लगे, कुछ ने बोला 2-3 दिन का इंतजार करो और बेसिक दवाइयां खाओ। और कुछ लोगो ने बोला COVID-19 का टेस्ट करा लो। फिर क्या था मैंने COVID-19 का टेस्ट कराया और लक्षण के अनुसार टेस्ट पॉजिटिव मिला। फिर क्या ही था तुरंत अस्पताल से फोन आया कि आप अस्पताल तुरंत आ जाइए एडमिट करना हैं, फिर क्या था मैंने पूछा कि एम्बुलेंस भेज सकते हैं परतुं एम्बुलेंस उपलब्ध ना थी , तब मेरे पास दो ही रास्ते थे; मैं प्राइवेट कैब बुक करू या अपनी कार से जाओ। यहां भी दिमाग में दो प्रश्न करने लगे कि अपनी कार से जाऊंगा तो कार कहां खड़ी करूंगा और कहां भेजेंगे क्वांटाइन को ये भी नहीं पता था। दूसरा प्रश्न ये था कि अगर मैं प्राइवेट कैब बुक करता हूं तो कैब ड्राइवर को खतरा था covid से। और मैं नहीं चाहता था कोई मेरी वजह से पॉजिटिव हो जाए और मैं दूसरे विकल्प के साथ गया क्यों कि किसी की जान को मैं जोखिम में नहीं डाल सकता था।

Hospitalization
Dr Bhimrao Ambedkar Multispeciality Hospital,
सेक्टर 30, नोएडा , दिनांक 12-July-2012, दोपहर के 01:00 बजे मैं अस्पताल पहुंचा जहां मेरा COVID-19 का टेस्ट हुआ था अब मुझे यहां से कोरांटाइन सेंटर भेजना था मैं काफी बायभीत और डरा सा था कि मुझे कहां भेजेंगे और कैसे, और कैसा होगा कोरांटाइन सेंटर। मगर किस्मत को कुछ ही मंजूर था, बगल में ही पीजीआई दे दिया गया (जहां लोगो को भर्ती होने के लिए किस्मत की जरारुर होती है कि बेड मिल जाए). फिर क्या ही था मुझे रूम नंबर क्यूबिक 2, बेड नंबर 09 दे दिया गया और इलाज प्रारंभ कर दिया गया। मुझे सबसे पहले दवाइयों का जखीरा पकड़ा दिया गया और समझाया कि इसे कैसे खाना हैं। दवाइयां कुछ इस प्रकार थी:

*Before Breakfast : Renitidine*
*Daily Evening: Hetero 75mg*
SOS on fever : Dolo Paracetamol 650mg
SOS on Pain: Ibuprofen 200mg
Daily: Vitamin B
Daily: Vitamin C Limcee/Ascorbic Acid 500mg
Hydrochloquine - Starting ki do dose subah and sham ki 400 mg ki hogi rest , 1 tab morning and 1 tab evening in a day of 200 mg till 5 Days
Daily: Zinc Sulphate
Daily Anibiotoc: Azithromycin 500mg
Daily 4 tab: Dexona

इतनी दवाईयां खाने के बाद नींद ऐसी आईं जैसे बरसों के बाद ऐसी नींद आई हो।

Note: Please consult your Doctor before taking any medicine,I am not a Doctor just sharing my experience.


to be continued......