Friday, 27 July 2012

गैरो के लिए हमने एक बात कहीं होती....!!



गैरो के लिए हमने एक बात कहीं होती
कुछ दिल से कहा होता कुछ रात कहीं होती
मेरे लिए वो दिल से अरमा वो सजा देती
गर वो प्यार मुझे करती, दुनिया से न वो डरती
अल्फाज को वो दिल से एक ख्वाब बना देती 
गैरो के लिए हमने एक बात कहीं होती
अन्जान समझ बैठी मुझको वो तो ऐसे
वो दूर जा रही हैं बारिश हो फिर वो जैसे
भीगा बदन हैं मेरा, वो नाम ले रहा हैं
लफ्ज हैं जो उसके, वो इंकार कह रहे हैं
जानता था मैं भी, ये प्यार न था मुझसे
मैं प्यार के हवाले रास्ता बना रहा था
वरसों गुजर गए थे, मौसम बदल गए हैं
वो पत्थर की थी मूर्ति, उसे कुछ न याद आया
वो भीगा बदन खड़ा था, फिर न उसे कोई ख्वाब आया
गिरा वो जमीं पर, एक लाश बन गया था
उस मूर्ति सी खड़ी लड़की को न कोई ख्याल आया 
जब पता चला उसे, की वो लाश बन गया हैं
वो पीछे भी न वो पलटी, उसे तो एक नया साथ मिल गया हैं
गैरो के लिए हमने एक बात कहीं होती
कुछ दिल से कहा होता कुछ रात कहीं होती

                                                                            द्वारा :- संदीप शरद
                                                                                        असिस्टेंट मैनेज़र (प्लानिंग - सिविल)
                                                                                         एरा ग्रुप (नॉएडा)   
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