Monday, 6 October 2014

शायद आइना बदल गया



कई बरश वो बीत गए, कइयों मौसम बीत गए,
नहीं बदला वो प्यार हमारा शायद आइना बदल गया !!

हम डूबे रहते रातों दिन, वो समय का शार बदल गया,
हम न बदले आज भी यारो पर चेहरा उनका बदल गया !!

बरसो  पहले चाहा जिसने उसका प्यार बदल गया,
जब पूछा हमने याद हैं उनको, तो उनका रंग ही बदल गया !!

नहीं बदला वो प्यार हमारा शायद आइना बदल गया....शायद आइना बदल गया

कुछ न बदला मेरे दिल में, उनका दिल ही बदल गया,
जाना उसने हर बात को मेरे, पर उनका आसय बदल गया !!

नहीं बदला वो प्यार हमारा शायद आइना बदल गया....शायद आइना बदल गया

बरसो पहले याद हैं मुझको मैं प्यार के खातिर बदल गया,
छूटी मुझसे मदिरा यारो, सिगरेट का धुँआ बदल गया !!


नहीं बदला वो प्यार हमारा शायद आइना बदल गया....शायद आइना बदल गया

चाहा जिसको हमने यारो, उसके खातिर मैं बदल गया,
जब पुछा हमने प्यार हैं मुझसे, तो आइना बदल गया!!

नहीं बदला वो प्यार हमारा शायद आइना बदल गया....

द्वारा
संदीप शरद

Thursday, 10 April 2014


आज मैं टूटे ख्वाब को, हकीकत में बयां करने चला !
ना था कोई मेरे साथ, और आज फिर अकेला ही चला !!
ये मतलबी दुनियां हैं मेरे दोस्त, यहाँ कोई हमसफ़र नहीं हैं !
जो हमसफ़र था मेरे साथ, वो भी साथ छोड़ चला !!
चला फिर दो कदम, करावैं मंजिल की तरफ !
देखा तो वहां, एक ख्वाब सा जगा !!
सोचा भी न, समझा भी ना, चल पड़ा उस अनजान मंजिल की तरफ !
ढूढता रहा, सपनो को उस हकीकत तक, जो अपना कभी था ही नहीं !!
मैं उस अनजान मंजिल को, उस अनजान राहों को, तलाशता हूँ आज भी !
पर न जाने उन ख्वाबों, में "शरद" कहा खो गया !!....

                                                                                   द्वारा :- संदीप शरद
                                                                                   बी . टेक . :- अच्. बी. टी. आई. - कानपूर