इस कदर चला जा रहा हूँ , अकेला ही चला जा रहा हूँ,
करवटें बदलती यें जिंदगी , जिन्दगीं से इम्तिहान लिए चला जा रहा हूँ ...बस चला जा रहा हूँ..,
अकेला था तब भी , अकेला हूँ अब भी,
इसी सिलसिले को आगे बढाएं चला जा रहा हूँ,
पढाई वो करना , वो कॉलेज मे आना , इंजिनियर सा हमको वो इंसा हैं बनना,
इंसा को प्यार था किसीसे फिर करना,वो प्यार था मोहब्बत मैं बदलना ,
इसी किस्से को आगे था चलना, चलकर इसे था यूँ शादी में बदलना ,
न सोचा था ऐसी ये घटना घटेगी, वो लड़की मेरे साथ आगे ना चलेगी,
जैसे दुनियां थी ठहरी और कदम रुक पड़े थे
जिसको जाना ना हमने और माना ना हमने , ऐसे ही हाथ हमको मिले थे!!
सहारा मिला और फिर मैं चल पड़ा था, कदम द- कदम मौत का कारवां था..
जिसे छोड़कर मैं आया यहाँ पर , जिंदगी को जीना था सीखा वहां पर ,
ना होता हैं अपना इस जहाँ पर कोई , सीखा था हमने इसी दुनिया में आकर ,
मुझे था ना मालूम की कौन हैं हमसफ़र मे,
पीछे ना पलता , ना पथभ्रष्ट में हुआ था.
क्योंकी उस समय था अकेला और अकेला चला था,
कदम द- कदम मौत का कारवां था....!!!
. द्वारा ..संदीप शरद
सीनिईर प्लानिंग इंजिनियर
बी. टेक - अच्. बी .टी .आई. कानपूर
करवटें बदलती यें जिंदगी , जिन्दगीं से इम्तिहान लिए चला जा रहा हूँ ...बस चला जा रहा हूँ..,
अकेला था तब भी , अकेला हूँ अब भी,
इसी सिलसिले को आगे बढाएं चला जा रहा हूँ,
पढाई वो करना , वो कॉलेज मे आना , इंजिनियर सा हमको वो इंसा हैं बनना,
इंसा को प्यार था किसीसे फिर करना,वो प्यार था मोहब्बत मैं बदलना ,
इसी किस्से को आगे था चलना, चलकर इसे था यूँ शादी में बदलना ,
न सोचा था ऐसी ये घटना घटेगी, वो लड़की मेरे साथ आगे ना चलेगी,
जैसे दुनियां थी ठहरी और कदम रुक पड़े थे
जिसको जाना ना हमने और माना ना हमने , ऐसे ही हाथ हमको मिले थे!!
सहारा मिला और फिर मैं चल पड़ा था, कदम द- कदम मौत का कारवां था..
जिसे छोड़कर मैं आया यहाँ पर , जिंदगी को जीना था सीखा वहां पर ,
ना होता हैं अपना इस जहाँ पर कोई , सीखा था हमने इसी दुनिया में आकर ,
मुझे था ना मालूम की कौन हैं हमसफ़र मे,
पीछे ना पलता , ना पथभ्रष्ट में हुआ था.
क्योंकी उस समय था अकेला और अकेला चला था,
कदम द- कदम मौत का कारवां था....!!!
. द्वारा ..संदीप शरद
सीनिईर प्लानिंग इंजिनियर
बी. टेक - अच्. बी .टी .आई. कानपूर
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