Tuesday, 24 January 2012

धुंआ .........!!!!


पल पल मैन भी जीता रहता, पल पल मैन भी मरता हूँ
पल पल तेरे याद में आकर मैं भी खोया रहता हूँ,
ऐसे ही जज्बात वो हमने लिख डाले हैं कालमो से
प्यार मोहब्बत क्या ये होता ना जाना हैं वरसों से,
ऐसे ही हज्बात को हमने दिल से युहीं उतारा हैं
प्यार तो हमको हुआ नहीं,  हाँ हर गम को धुँआ बनाया हैं !!
धुँआ बनाया हर गम को, और दिल की युहीं फ़रियाद लिखी,
ऐसी ही हमने याद लिखी और दिल की ऐसी साज लिखी,
हमने तो हर पैमाने को ओठो से युहीं लगाया हैं,
हमको क्या, हमने तो हर गम को धुँआ बनाया हैं !!

प्यार नहीं , यूँ इश्क नहीं ऐसे जज्बात हमने लिखे नहीं,
प्यार का मतलब क्या होता ऐसी फ़रियाद हमने लिखी नहीं,
जीना तो हमने हैं सीखा पर मरना  हमने सीखा नहीं,
दुनिया वाले ये क्या कहते, ऐसा हमने फिर किया नहीं,
लोगो ने हमसे प्यार किया और हमने प्यार किया नहीं,
समझा हमको धोखेबाज और धोखा हमने दिया नहीं,
ऐसे ही जज्बातों को हमने युहीं उतारा हैं,
हमको क्या हमने तो हर गम को धुँआ बनाया हैं!!

अब जब हमको प्यार हुआ तो प्यार भी हमने देखा नहीं,
जीवन का मतलब क्या होता ,जीवन तो हमने जीना सीखा नहीं,
प्यार हमारा ऐसा हो, ऐसा हमने यूँ सोचा नहीं,
मानो की कश्ती जाएँ बहारों मैं, और उसको पार फिर लगना नहीं,
ऐसा ही प्यार हमारा था , जिसने हमको धुत्कार दिया,
जिसके खातिर क्या करते , उसने तो जीवन त्याग दिया,
ऐसा ही प्यार हामारा था . जिसको हमने फिर याद किया,
याद किया , फ़रियाद किया, अपना जीवन बर्बाद किया,
ऐसे ही गम को मैं सारा जीवन साथ चलता हूँ ,
मुझको क्या मैं तो हर गम को धुँआ बनाता हूँ!!
.                                                                                             द्वारा ..संदीप शरद
                                                                                              सीनिईर प्लानिंग इंजिनियर
                                                                                बी. टेक -   अच्. बी .टी .आई. कानपूर

5 comments:

  1. wah bhai..... Sala tu kab se kavi ban gaya...

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  2. शकील लगता हैं तू काफी दिनों बाद मिला हैं तभी कह रह आहें वरना ये अल्फाज तू लाता ही नहीं, खैर तू मेरी बिओग्रफ्य पढ़ सकता हैं पता चल जाएगा....

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