प्यार के वास्ते...
मेरे दिल की देखो पारी जा रही हैं ,
बहारो की मल्लिका चली जा रही हैं ,
सुबह शाम उसकी यू याद आ रही हैं,
याद आ रही हैं चली जा रही हैं,
मेरे दिल को यू छोरे जा रही हैं, परी जा रही हैं,,,,,,चली जा रहीं हैं ....
दिल की ये धरकने मुझे बता रहीं हैं,
पारी भी तो मुझको बहुत चाह रही हैं , मगर चली जा रहीं हैं ....
उसकी यादों के सहारे जियें जा रहा हूँ ,
चला जा रहा हूँ .. मैं भी चला जा रहा हूँ.......
राहों को मैं भी चुने जा रहा हूँ ...उसके पीछे मैं भी चला जा रहा हूँ...बस चला जा रहा हूँ......!!!
राहों पे काटें बिछे जा रहे हैं , चुभे जा रहे हैं ..और चुभे जा रहे हैं ...
लेकिन हम उन्ही पर चले जा रहे हैं ..चले जा रहे हैं...!!
वतन के वास्ते....!!!
....वतन के सिपाही यूं बढे जा रहे हैं,
देखो सहीद जा रहे हैं...चले जा रहे हैं...
सलामी उन्हें हम दिए जा रहे हैं, चले जा रहे हैं बढे जा रहे ,
कश्मीर को अपना लिए जा रहे हैं, बढे जा रहे हैं बस चले जा रहे हैं .....
बच्चो और नवजवानों के वास्ते....
...... ये बच्चे भी आगे चले जा रहे हैं,
कोई आइ.ऐ .एस, कोई पी.सी.एस , कोई बिसनेस मैन बने जा रहे हैं,
और भारत की रक्षा किये जा रहे हैं हैं...,
चले जा रहे हैं बढे जा रहे हैं ...
ठोकर लगी तो न रुका हैं वहा पर ,
सपूत हैं वो भारत के बढे जा रहे हैं हैं ..चले जा रहे हैं ...
मिसाइल जो बनाया अब्दुल कलाम ने ,
मिसाइल मैन वो भी कहें जा रहे हैं ...बढे जा रहे हैं ..!!
कश्ती जो डूबी थी, कश्ती पुरानी..
हम लहरों से लढ़े जा रहे हैं ,.
किनारें लगें जा रहे हैं बढे जा रहे हैं ..
चले जा रहे हैं और चले जा रहे हैं..और चले जा रहे हैं .. ......................द्वारा ..संदीप शरद
सीनिईर प्लानिंग इंजिनियर
बी. टेक - अच्. बी .टी .आई. कानपूर
मेरे दिल की देखो पारी जा रही हैं ,
बहारो की मल्लिका चली जा रही हैं ,
सुबह शाम उसकी यू याद आ रही हैं,
याद आ रही हैं चली जा रही हैं,
मेरे दिल को यू छोरे जा रही हैं, परी जा रही हैं,,,,,,चली जा रहीं हैं ....
दिल की ये धरकने मुझे बता रहीं हैं,
पारी भी तो मुझको बहुत चाह रही हैं , मगर चली जा रहीं हैं ....
उसकी यादों के सहारे जियें जा रहा हूँ ,
चला जा रहा हूँ .. मैं भी चला जा रहा हूँ.......
राहों को मैं भी चुने जा रहा हूँ ...उसके पीछे मैं भी चला जा रहा हूँ...बस चला जा रहा हूँ......!!!
राहों पे काटें बिछे जा रहे हैं , चुभे जा रहे हैं ..और चुभे जा रहे हैं ...
लेकिन हम उन्ही पर चले जा रहे हैं ..चले जा रहे हैं...!!
वतन के वास्ते....!!!
....वतन के सिपाही यूं बढे जा रहे हैं,
देखो सहीद जा रहे हैं...चले जा रहे हैं...
सलामी उन्हें हम दिए जा रहे हैं, चले जा रहे हैं बढे जा रहे ,
कश्मीर को अपना लिए जा रहे हैं, बढे जा रहे हैं बस चले जा रहे हैं .....
बच्चो और नवजवानों के वास्ते....
...... ये बच्चे भी आगे चले जा रहे हैं,
कोई आइ.ऐ .एस, कोई पी.सी.एस , कोई बिसनेस मैन बने जा रहे हैं,
और भारत की रक्षा किये जा रहे हैं हैं...,
चले जा रहे हैं बढे जा रहे हैं ...
ठोकर लगी तो न रुका हैं वहा पर ,
सपूत हैं वो भारत के बढे जा रहे हैं हैं ..चले जा रहे हैं ...
मिसाइल जो बनाया अब्दुल कलाम ने ,
मिसाइल मैन वो भी कहें जा रहे हैं ...बढे जा रहे हैं ..!!
कश्ती जो डूबी थी, कश्ती पुरानी..
हम लहरों से लढ़े जा रहे हैं ,.
किनारें लगें जा रहे हैं बढे जा रहे हैं ..
चले जा रहे हैं और चले जा रहे हैं..और चले जा रहे हैं .. ......................द्वारा ..संदीप शरद
सीनिईर प्लानिंग इंजिनियर
बी. टेक - अच्. बी .टी .आई. कानपूर
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