परिवर्तन
दिल्ली, राजधानी दिल्ली, जगह हौज खाश मेट्रोस्टेशन, रिंग रोड साइड जहाँ ओखला , कालका जी, गोविंदपुरी, नेहरू प्लेस इत्यादि महत्वपूर्ण स्थानो के लिए ऑटो रिक्शा मिलते हैं, सुबह ऑफिस का समय, भागदौड़ जिंदगी में हम भी मेट्रो से बाहर आये रोजाना की तरह, हमने भी लोगो की तरह ऑटो बुलाना शुरू कर दिए, भाई साहब ! ओखला फेज १ चलेंगे, जवाब में , १२० रूपया, कोई कहता १३० रुपया, एक भाई साहब ने थोड़ा कम भाड़ा बोला १०० रुपया, पर हमारा एक ही जवाब था जितना भी बनता हैं हम मीटर से ही चलेंगे.... पर कोई ऑटो रिक्शा तैयार न हुआ। । हम भी काफी देर तक कोशिस करते रहे तभी हमारी निगाह एक ट्रैफिक पुलिस वाले पर गईं. वो किसी ऑटो वाले से कुछ बोल रहा था, तभी मैं भी वहां पंहुचा तो जो मैंने देखा वाकई देखता ही रह गया। … पहली दफा थी की कोई पुलिस वाला, चाहे वो ऑटो वाला हो या हम जैसा कोई आम नागरिक , बहुत ही तहजीब से बाते कर रहा था, एक बार तो ऐसा लगा की ऐसे पुलिस वाले अगर हमारे यहाँ हो तो शायद जो पुलिस के पास जाने में डरते हैं वो कभी नहीं डरेंगे और ऐसा लग रहा था मानो की हमारा कोई दोस्त हो.... पुलिस वाला उस ऑटो वाले से ये कह रहा था की तुम्हारे मीटर में सरकार ने अतरिक्त पैसे के साथ मीटर फिक्स किआ हैं तो आप बिना मीटर के क्यों चला रहे हैं। … आप की वजह से ये आम आदमी धूप में खड़े हैं एक आश के साथ की कोई तो चलेगा। । अब आप हमारी मदद नहीं करेंगे तो आप सरकार से क्या उम्मीद करेंगे। . मतलब साफ़ था हम आपस में एक दूसरे की मदद करे बिना किसी फायदे के... और हमारे देखते ही देखते वो ऑटो वाला उस पुलिस वाले के पैरो पर जा गिरा और बोला साहब माफ़ करना गलती हो गई , उस पुलिस वाले ने बोला, सब ऊपर वाला हैं वहीँ देखता हैं हम अपना काम ईमानदारी से करते रहे जैसे केजरीवाल साहब करते हैं। ……
मैं ये देख कर वाकई मैं अचम्भे में पड़ गया की अब तो कोई चुनाव माहौल भी नहीं हैं फिर भी ये केजरीवाल साहब का नाम ले रहा हैं। … फिर क्या था हमने भी अपनी पड़ताल शुरू कर दी और करीब 12 लोगो से पूछा तो उनका जो जवाब वाकई दिल छू लेने वाला था , की ये एक पुलिस वाला नहीं यहाँ हर पुलिस वाला ऐसा ही हैं जबसे केजरीवाल साहब आये हैं। …
ये सब सुनाने और देखने के बाद हम यहीं सोचते हैं अच्छे लोगो को मीडिया हमारे बीच क्यों नहीं लाती हैं। ., हम किसी का समर्थन नहीं करते हैं हमें तो राजनीती का अ भी नहीं आता, पर हाँ अगर किसी के नाम पर कोई अच्छा काम करने लगता हैं तो वाकई में वो बहुत महान हैं। … हम यहीं आशा करेंगे अगर आज २-४ लोग बदले हैं तो उम्मीद हैं ५ साल बाद सारा दिल्ली बदलेगा। …। !!
संदीप शरद

No comments:
Post a Comment