एक दिल की कहानी को सुनाने मैं आया हूँ,
हर ख्वाब की कश्ती को किनारे मैं लाया हूँ,
आंधी भी बहुत तेज हैं, बारिश भी बहुत हैं,
ये मोहब्बत जो किया हमने, सुनामी की तरह हैं,
एक बार जो आती हैं, कुछ बचता भी नहीं हैं,
जो बच गया यारों, वो मुकद्दर का धनी हैं,
मजनू भी यहाँ था, लैला भी यहाँ थी,
जब प्यार हुआ इनमें, तो सुनामी ये बनी थी,
लोगो ने उसे प्यार का एक नाम दिया था,
जब टूट गए दोनों, वो सुनामी का कहर था,..........!!
आज सुनाता हूँ तुम्हें एक नई कहानी,
वर्षों सी नहीं हैं, पर कुछ हैं ये पुरानी,
ये कहानी भी उनकी हैं, जिनके शब्द हैं मिलते,
ये कैसी जवानी, मगर हैं एक तरफा कहानी-.....हैं एक तरफा कहानी...
जब दरमियाँ ये जिंदगी, कहने ये लगी थी,
तब प्यार की ये घटना ऐसे ही घटी थी,
न बात किया हमने, न आवाज दिया था,
उस चहरे पर अलग सा एक अहसास बना था,
मैं जनता नहीं था, कैसा ये प्यार था??,
लेकिन मुझे पता, वो एक तरफा प्यार था,
नादान था यूँ मैं भी, अनजान भी मैं था,
वो तो किसी और की बन कर ही रह गई,
मुझको पता न था, सच कहता जवाना,
फिर भी मैं प्यार के फ़साने मैं बह गया,
मैं सोचता रहा, वह अहसास लाएगी,
एहसास के फसाने में, मैं जलाता चला गया,
गुजर गया समय वो शाम आ गई,
वो दिन था उजाले की फिर रात आ गईं.......!!!
द्वारा :- संदीप शरद
सीनिओर प्लानिंग इंजिनियर (सिविल)
बी . टेक . :- अच्. बी. टी. आई. - कानपूर
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