Saturday, 24 March 2012

@@....अल्फ़ाज.....@@.....!!!!




हम अल्फाज़ खोजते हैं अल्फाज नहीं मिलते,
अरमान मेरे दिल के हर बार नहीं मिलते!
हसते तो हम भी ऐसे, खुशियाँ हो मानों जैसे,
जब टूटते हैं दिल से तो राज नहीं मिलते!!
अरमान खोजते  हैं , आराम खोजते  हैं ,
इस दर्द भरी दुनियां में एक राज खोजते  हैं !
उस राज के लिए हर बार सोचते  हैं ,
कोई मरता हैं दिल से ऐसे कोई प्यार खोजते  हैं,
कोई खुशनसीब होता, कोई बदनसीब होता,
जो करता प्यार दिल से, वो जीत सोचते  हैं,
हारा वही यहाँ पर,जो अपना ही सोचते  हैं,
सोचा हैं दिल से ऐसे, वो राज हैं यहीं पर ,
वो अपनों के लिए ही , एक राज खोजते  हैं,
हम अल्फाज खोजते हैं,अल्फाज नहीं मिलते,
अरमान मेरे दिल के हर बार नहीं  मिलते ..........

 वो गम भी देखता हूँ, वो राज सोचता हूँ,
गरीब की कहानी इन्सां को सोचता हूँ,
महंगा हुआ यहाँ पर, एक राज बन गया हैं,
गरीब था वो इन्सां ,एक लाश बन गया हैं
सोचा था हमने ऐसे, आएगा कोई जैसे,
महंगा हुआ जवाना, खायेगा फिर वो कैसे,
गरीब था जो इन्सां वो हर रात मर रहा हैं,
पसीने की कमाई, अमीर भर रहा हैं,
गुलाम था जो भारत , आज याद आया,
वो अंग्रेज भी थे अच्छे,.... जब भ्रटाचार आज आया,
हम कैद हो गए हैं, एक राज बन गए हैं,
शमसान में बैठे, एक लाश बन गए हैं,
उस लाश की कहानी , एक अल्फाज खोजते हैं,
अरमान मेरे दिल के, हर बार खोजते हैं.....
ऐसी थी ये कहानी जो हम दिन और रात खोजते हैं
अल्फ़ाज खोजते हैं और अल्फ़ाज खोजते हैं ......!!!!

                                                                                               द्वारा :- संदीप शरद
                                                                                              सीनिओर प्लानिंग इंजिनियर (सिविल)
                                                                                             बी . टेक . :- अच्. बी. टी. आई. - कानपूर





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